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BSNL में फिर सैलरी का संकट

नई दिल्ली  :  आर्थिक संकट से जूझ रही सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल (भारत संचार निगम लिमिटेड) के 1.76 लाख कर्मचारियों की जून की सैलरी मिलने में देरी हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो करीब 6 महीने के भीतर दूसरी बार होगा जब बीएसएनएल के कर्मचारी समय पर सैलरी पाने से वंचित रहेंगे. इससे पहले कर्मचारियों को फरवरी महीने की सैलरी भी मार्च के तीसरे हफ्ते में मिली थी. बता दें कि बीएसएनल के कर्मचारियों को हर महीने के आखिरी या अगले महीने के पहले वर्किंग डे तक सैलरी मिल जाती है.
रिपोर्ट के मुताबिक बीएसएनएल ने सरकार से कहा है कि कंपनी के पास कामकाज जारी रखने के लिए पैसे नहीं हैं. कंपनी के मुताबिक कैश की कमी की वजह से जून के लिए लगभग 850 करोड़ रुपये की सैलरी दे पाना मुश्किल है. बीएसएनएल के कॉर्पोरेट बजट एंड बैंकिंग डिविजन के सीनियर जनरल मैनेजर पूरन चंद्र ने टेलिकॉम मंत्रालय में ज्‍वाइंट सेक्रटरी को लिखे एक पत्र में कहा, ‘हर महीने के रेवेन्यू और खर्चों में अंतर की वजह से अब कंपनी का संचालन जारी रखना चिंता का विषय बन गया है.’ उन्‍होंने आगे कहा कि अब यह एक ऐसे लेवल पर पहुंच चुका है जहां बिना किसी पर्याप्त इक्विटी को शामिल किए बीएसएनएल के ऑपरेशंस जारी रखना लगभग नामुमकिन होगा.’  अगर बीएसएनएल आज इन हालातों में है तो इसके पीछे कई वजह हैं. सबसे बड़ी वजह कंपनी का कर्मचारियों पर खर्च है. दरअसल, बीएसएनएल का कुल आमदनी का करीब 55 फीसदी कर्मचारियों के वेतन पर खर्च होता है. हर साल इस बजट में 8 फीसदी बढ़ोत्तरी हो जाती है. आसान भाषा में समझें तो वेतन पर खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है और आमदनी में गिरावट आ रही है.बीएसएनएल की कमर तोड़ने में रिलायंस जियो की टेलिकॉम इंडस्‍ट्री में एंट्री ने भी अहम भूमिका निभाई. दरअसल, साल 2016 में जियो के आने के बाद टेलिकॉम कंपनियों में सस्‍ते डेटा पैक और टैरिफ की जंग छिड़ गई. कई टेलिकॉम कंपनियां बोरिया- बिस्‍तर समेटने पर मजबूर हुईं. वहीं बीएसएनएल भी जियो, एयरटेल और वोडाफोन के मुकाबले पिछड़ती चली गई. साल 2018 में कंपनी को करीब 8,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ है. साभार  आजतक

About Author Umesh Nigam

crime reporter.

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