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दोस्ती के नाम पर अभिनंदन को छोड़ा लेकिन कई सवालों में फंस गया पाकिस्तान

नई दिल्ली: भारतीय वायु सेना के पायलट, विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान शुक्रवार रात भारत लौट आए. उन्हें पाकिस्तान ने उस वक्त अपने कब्जे में ले लिया था, जब उनका मिग-21 लड़ाकू विमान पाकिस्तानी क्षेत्र में हादसे का शिकार हो गया था. नीली कोट, ग्रे पैंट और सफेद शर्ट पहने अभिनंदन की अगवानी सीमा सुरक्षा बल (सीआरपीएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों ने बाघा बॉर्डर पर की. अभिनंदन को शून्य रेखा (भारत-पाक सीमा पर नो मैंस जोन) पर रिसीव किया गया.
अटारी सीमा पर शुक्रवार सुबह से ही लोगों का हुजूम इकट्ठा होने लगा था. पलक-पांवड़े बिछाकर पूरा हिंदुस्तान वीर अभिनंदन के अभिनंदन का इंतजार कर रहा था. ये इंतजार लंबा था, कुछ ज्यादा ही लंबा लेकिन उस इंतजार के आखिर में इस मुल्क के हिस्से में जो खुशी आई उसे किसी पैमाने से नापा नहीं जा सकता. इससे पहले पाकिस्तान की ओर से राजनीति के बहुत दांव पेंच खेले गए. कूटनीति के तमाम वार पलटवार हुए लेकिन आज जब अभिनंदन ने भारत की सीमा में पैर रखे तो सारे दुख, सारा इंतजार, सारी थकान हवा हो गई.हालांकि, अभिनंदन की वतन वापसी इतनी आसान न रही क्योंकि पाकिस्तान ने उन्हें भारत भेजने से पहले कई बार समय बदले. इतना कुछ के बावजूद लोग अपने कमांडर के इंतजार में सड़कों पर डटे रहे. देर इसलिए हुई क्योंकि पाकिस्तान हिंदुस्तानियों के इस उत्साह को तमाशे में बदलना चाहता था. वो चाहता था कि जब अभिनंदन को हमें सौंपे तो उसे दुनिया को दिखाने का मौका मिले. वो चाहता था कि वाघा-अटारी सीमा पर शाम के बीटिंग रिट्रीट समारोह के दौरान विंग कमांडर अभिनंदन को भारत के सुपुर्द किया जाए लेकिन भारत ने दो टूक कह दिया कि ऐसा करने का सवाल ही नहीं उठता. आखिर हिंदुस्तान अपने वीर की वापसी को तमाशे में कैसे बदलने देता.भारत ने पाकिस्तान को समझा दिया कि अब उसका कोई भी पैंतरा काम नहीं करने वाला है. विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी हुकूमत को साफ संदेश भेजा कि आप उतना ही कीजिए जितना जिनेवा की संधि कहती है. न उससे कम और न उससे ज्यादा. बाकी हम देख लेंगे. बौखलाए पाकिस्तान के सामने इसे स्वीकार करने के सिवा कोई चारा नहीं था. आपको बता दें कि करगिल युद्ध के बाद भी पाकिस्तान फाइटर पायलट नचिकेता को मीडिया के सामने भारत को सौंपना चाह रहा था लेकिन भारत से साफ इनकार कर दिया था. इस बार भी भारत ने उसे साफ समझा दिया है कि जब भी देश की बात आएगी, सेना की बात आएगी, शौर्य की बात आएगी, भारत पाकिस्तान के साथ कोई मुरव्वत नहीं बरतने वाला.पाकिस्तान के कथित ‘ग्रैंड जेस्चर’ पर तब और सवाल उठ गए जब पाकिस्तानी सरकार की ओर से जारी प्रेस रिलीज में अभिनंदन को पीओडब्लू लिखा गया लेकिन यह कहीं उसमें जिक्र नहीं किया गया कि उन्हें जिनेवा कन्वेंशन के तहत छोड़ा गया है. यह कितनी बड़ी विडंबना है कि खुद को एक लोकतंत्र कह कर ढिंढोरा पीटने वाला पाकिस्तान एक ओर पीओडब्लू की बात करता है जबकि दूसरी ओर जिनेवा कन्वेंशन की बात भी नहीं उठाता. इतना ही नहीं जिनेवा कन्वेंशन को दरकिनार करते हुए दुनिया में यह जतलाने की कोशिश करता है कि भारतीय कमांडर को ‘गुडविल’ और शांति संदेश के नाते छोड़ा जा रहा है. इस पर आगे विवाद होना तय है क्योंकि भारत इसे दुनिया के सामने जरूर रखेगा. साभार आजतक

About Author Umesh Nigam

crime reporter.

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