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कुंभ जैसे विशाल मेले पर शोध कार्य हो: राज्यपाल

भोपाल : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में कहा कि कुंभ जैसा विशाल मेला भारत जैसे देश में ही संभव है। यहाँ प्रतिदिन एक यूरोप के बराबर आबादी विश्वास और आस्था के साथ आती है और गंगा में स्नान कर आत्म तृप्ति का अनुभव करती है। यहाँ बिना किसी दुर्घटना के आयोजन होते हैं। यहाँ की स्वच्छता, सुरक्षा और धर्मार्थियों के लिये किये गये इंतजाम कैसे किये जाते हैं, यह हम सभी के लिए जानना जरूरी है। अत: विश्वविद्यालयों को इस विशाल धार्मिक आयोजन के विषय में भी विद्यार्थियों को शोध कार्य के लिये प्रेरित करना चाहिए, जिससे यह भव्य आयोजन एक पुस्तक के रूप में लोगों तक पहुँचे।
राज्यपाल ने कहा कि रविन्द्रनाथ टैगोर एक ऐसा व्यक्तित्व थे, जिनकी प्रतिभा और योग्यता के कारण उनका साहित्य देश-विदेश में पहुँचा। उनकी कृति गीतांजलि के अंग्रेजी और अन्य भाषाओं में अनुवाद के कारण उन्हें लोकप्रियता और साहित्य के क्षेत्र में आशातीत सफलता मिली और वे गुरूदेव के रूप में विख्यात हुए। भारत का राष्ट्र गान ‘जन-गण-मन’ और बांग्लादेश का राष्ट्रीय गान ‘आमर सोनार बांग्ला’ उनकी साहित्यिक प्रतिभा और देश प्रेम का प्रतीक हैं। राज्यपाल ने गुरूदेव की रचना ‘मेरा शिश नवा दो, डुबा दो अहंकार सब मेरे आंसू जल में’ पढ़ी। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में गुरूदेव रविन्द्रनाथ टैगोर की प्रतिमा पर पुष्पाजंलि अर्पित की। राज्यपाल ने भारत में म्यामार के राजदूत मो चो आंग एवं पश्चिम बंगाल रंगमंच की विदुषी ऊषा गांगुली को डी लिट. की मानद उपाधि प्रदान की। पी.एच.डी के 28, स्नातकोत्तर के 20, स्नातक के 25 और 10 गोल्ड मेडलिस्ट छात्र-छात्राओं को उपाधि प्रदान की। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित स्मारिका का विमोचन भी किया।

About Author Umesh Nigam

crime reporter.

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