[Latest News][6]

गैलरी
देश
राजनीति
राज्य
विदेश
व्यापार
स्पोर्ट्स
स्वास्थ्य

बिल में नीरव मोदी जैसे केस में संपत्ति जब्त करने के प्रावधान

मुंबई: बैंक धोखाधड़ी को अंजाम देकर पहले विजय माल्या विदेश भागे और अब पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के बाद नीरव मोदी देश छोड़कर जा चुके हैं. बैंक धोखाधड़ी के ऐसे मामलों को तेजी से निपटाने के लिए मोदी सरकार फ्यूजीटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर बिल लेकर आई है.
इस बिल को सितंबर 2017 में पेश किया गया था. इसका मकसद संवैधानिक और प्रभावी तरीके से मामलों को तेज गति से निपटाना है. ताकि इस तरह की गतिविधियों को रोका जा सके. साथ ही इस बिल से धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने फ्यूजीटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर बिल-2017 का उल्लेख पहली बार 2017-18 के बजट भाषण में किया था. किंगफिशर एयरलाइंस फ्रॉड मामले में 9,000 करोड़ रुपये की चपत लगाने वाले विजय माल्या को भारत लाने में सरकार की नाकामी के बाद वित्त मंत्री ने इसका जिक्र किया था. वित्त मंत्री ने बिल को पेश करते हुए कहा था, ‘हाल में कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं जिसमें आर्थिक धोखाधड़ी को अंजाम देने के बाद कानून से बचकर लोग देश से भाग गए. हमें सुनिश्चित करना होगा कि कानून अपनी भूमिका निभाए. सरकार इसके लिए विधायी बदलाव करना या नया कानून लाना चाहती है. जिसमें यह प्रावधान हो कि आरोपियों की देश में स्थित संपत्ति जब्त रखी जाए, जब तक वह खुद को कानून के समक्ष पेश नहीं कर देते हैं.’ प्राथमिक तौर पर देखा जाए तो प्रस्तावित बिल जांच एजेंसियों और सरकार को आर्थिक धोखाधड़ी के बाद देश छोड़ने वालों की संपत्ति जब्त करने का अधिकार देता है. बिल के तहत जानबूझकर ऋण न चुकाने, धोखाधड़ी और जालसाजी, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के जरिये फर्जीवाड़ा करना, फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल करना, जमाराशियों का भुगतान न करना जैसे मामले आएंगे. बिल में प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत ‘स्पेशल कोर्ट’ स्थापित करने का भी प्रस्ताव है. इस कोर्ट के पास आरोपी को आर्थिक भगोड़ा करार देने का अधिकार होगा. बिल में फ्यूजीटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर यानी आर्थिक भगोड़ा अपराधी को परिभाषित करते हुए कहा गया है कि वैसा शख्स जिसे अधिसूचित अपराधों के तहत गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया हो, लेकिन वह आपराधिक मुकदमा से बचने के लिए देश छोड़कर भाग गया हो, उसे आर्थिक भगोड़ा अपराधी घोषित किया जाएगा. इस बिल के तहत अपराधियों को अनुपालन करने के लिए केवल छह सप्ताह मिलेगा. बिल के मुताबिक अगर यह मामला 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक का होता है तो उसे कोर्ट को सुपुर्द कर दिया जाएगा. दिल्ली स्थित कोचर एंड कंपनी के प्रिसिंपल एसोसिएट इंद्रानी लाहिड़ी का कहना है कि बिल के जरिए बैंक धोखाधड़ी से संबंधित मामलों से सख्ती से निपटने की कोशिश की गई है. इस बिल में मौजूदा कानूनों को भी लाने की कोशिश की गई है.मौजूदा कानून के तहत प्रर्वतन निदेशालय (ईडी) को प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत आरोपी की संपत्ति जब्त करने का अधिकार है, हालांकि मौजूदा कानून बिना दोषी ठहराये किसी की संपत्ति की कुर्की का अधिकार नहीं देता है. मौजूदा कानून के अंतर्गत प्रतिभूतिकरण और वित्तीय आस्तियों के पुनर्निर्माण व सुरक्षा ब्योरा अधिनियम, 2002, बैंक और वित्तीय संस्थान अधिनियम- 1993 शामिल है. प्रस्तावित बिल में एक कमी की तरफ इशारा करते हुए लाहिड़ी ने कहा कि बिल के सेक्शन 7(3) के मुताबिक संपत्ति जब्त करने का आदेश दिए जाने के 180 दिनों तक उसे वापस पाने का दावा नहीं किया जा सकता है, जो बहुत कम है. साभार aaj tak

About Author Umesh Nigam

crime reporter.

No comments:

Post a Comment

Start typing and press Enter to search