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शमशान घाट शुल्क जमा करने पर मिलती बिल्डिंग परमीशन

bhopal: प्रदेश की नगरीय निकाय अपनी मनमर्जी से काम करने के चलते हमेशा ही चर्चा में रहती है। निकायों में ई-नगरपालिका सिस्टम लागू होने के बाद नित नए खुलासे हो रहे है। प्रदेश में एक नगरीय निकाय ऐसा भी है जहां भवन निर्माण के लिए परमीशन देने के एवज में शमशान घाट शुल्क की वसूली की जा रही है।
अशोक नगर पालिका अपने नागरिकों से भवन निर्माण के लिए जारी की जाने वाली बिल्डिंग परमीशन देते समय आवेदक से 101 रुपय का शमशान घाट शुल्क की वर्षों से वसूली कर रही है। अशोक नगर के अलावा प्रदेश का कोई और नगरीय निकाय बिल्डिंग परमीशन देते समय शमशान घाट शुल्क की वसूली नहीं करती है। जानकारी के अनुसार बिल्डिंग परमीशन देने के लिए नगरीय निकाय भूमि विकास नियम 2012 के तहत बिल्डिंग परमीशन शुल्क ले सकती है। इसके अलावा निर्माण श्रमिकों के वास्ते बिल्डिंग परमीशन देने के लिए कर्मकार शुल्क की वसूली करती है। भोपाल नगर निगम ने भी कुछ साल पहले शासन अनुमति लिए बगैर ही बिल्डिंग परमीशन के साथ नर्मदा शुल्क वसूलना शुरू कर दिया था। यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था। बाद में नगर निगम भोपाल ने नर्मदा शुल्क वसूलना बंद कर दिया। रेन वाटर हर्वेस्टिंग के लिए शासन की अनुमति के बाद भोपाल नगर निगम डिपाजिट जरूर जमा करवाता है, जिसको शर्त पूरा होने के बाद लौटा दिया जाता है। लेकिन अशोक नगर नगर पालिका के द्वारा बिल्डिंग परमीशन देने के लिए शमशान घाट शुल्क वसूलने शासन से भी कोई मंजूरी नहीं ली गई और अशोक नगर की जनता पर यह शुल्क थोप दिया गया। ई-नगरपालिका लागू होने के बाद खुलासा हुआ कि प्रदेश के विभिन्न नगरीय निकायों में अलग-अलग तरह से बिल्डिंग परमीशन देते समय 26 तरह के शुल्क वसूल रहे हैं, मलवा, शमशान घाट शुल्क सहित कुछ और है।
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गठन के बाद से आज तक नहीं वसूला संपत्ति कर
नगरीय निकायों का मूल काम है क्षेत्र के आम नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाना और संपत्ति कर सहित कुछ अन्य करों की वसूली करना। लेकिन प्रदेश की आधा दर्जन नगरीय निकाय ऐसे हैं जहां गठन के बाद से आज तक संपत्ति कर की वसूली ही नहीं हुई है। यह खुलासा भी निकायों में ई-नगरपालिका सिस्टम लागू होने के बाद हुआ। जानकारी के अनुसार लिथौराखास, बैराढ, करहीपाडल्या, सागर जिले की मकरोनिया नगर परिषद में संपत्ति कर की वसूली ही नहीं होती है।

About Author Umesh Nigam

crime reporter.

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