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मप्र की प्रोविडेंट फंड कंपनी में अरबों का घोटाला

✍राज्य सरकार के वित्त विभाग के आला अफसरों की लापरवाही और मिलीभगत के चलते मुंबई स्थित मप्र सरकार की अरबों रुपए कीमत की संपत्ति के रिकॉर्ड में हेराफेरी कर ली गई है। इस मामले की जांच करने के लिए मुंबई गए वित्त विभाग के अधिकारियों पर मप्र की ही प्रोविडेंट फंड इंवेस्टमेंट कंपनी का एक बाबू भारी पड़ता नजर आ रहा है। मप्र  सरकार के आदेश के खिलाफ मुंबई हाईकोर्ट से स्टे लाकर इस बाबू ने वित्त विभाग के अधिकारियों को ही मुसीबत में डाल दिया है ।
जानकारी के अनुसार मुंबई में मप्र सरकार की करीब  1 लाख  50 हजार करोड़ से अधिक कीमत की संपत्ति है। जिसमें आलीशान गेस्ट हाउस, काफी संख्या में आवास, कोठी सहित कई अन्य संपत्ति है। इसके आलावा केरल-कर्नाटक के बार्डर पर कसारगोट में मिनाची स्टेट की 550 एकड़ बेशकीमती जमीन भी इस कंपनी के पास है, जिसमें काजू और रबर की खेती होती है। कंपनी की इस संपत्ति की देखभाल की जिम्मेदारी राज्य सरकार ने प्रोविडेंट इंवेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड को सौंप रखी थी। मुंबई स्थित इस कंपनी के दफ्तर का मैनेजर  लिपिक अतुल बोरकर को बना दिया गया था। मुंबई की इन संपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड अतुल बोरकर के पास ही रहता था। सूत्रों का कहना है राज्य सरकार को भनक लगी की मुंबई की इन संपत्तियों में से कुछ के दस्तावेजों में हेराफेरी कर ली गई । इसके अलावा बेशकीमती कई संपत्तियों पर प्रभावशाली लोगों ने कब्जा कर लिया है । इस मामले में प्रोविडेंट फंड इंवेस्टमेंट कंपनी के मैनेजर बोरकर पर ही वित्त विभाग को गड़बड़ी की आशंका थी, इसीलिए वित्त विभाग ने अगस्त 2017 में बोरकर को कंपनी के मैनेजर के पद से हटाकर वित्त सेवा की अधिकारी सुमित्रा मयूर को एमडी बनाकर मुंबई दफ्तर की जिम्मेदारी सौंपी थी । इसके साथ ही वित्त विभाग के उप सचिव मनोज जैन के नेतृत्व में  4 अधिकारियों का एक दल जांच के लिए मुंबई भेजा था। लेकिन बोरकर ने न तो सुमित्रा मयूर को चार्ज दिया और न ही इस जांच दल को मुंबई स्थित दफ्तर में घुसने दिया। इसके बाद वित्त विभाग ने कुछ दिन बाद  दूसरा चांज दल उप सचिव अदिति त्रिपाठी के नेतृत्व में फिर मुंबई भेजा। बोरकर ने इस जांच दल को भी दफ्तर में घुसने नहीं दिया। इस दल के बैरंग वापस आने के बाद तीसरा जांच दल बजट संचालक आईएएस अफसर अजीत कुमार के नेतृत्व में मुंबई गया। लेकिन अजीत कुमार को भी बोरकर ने मुंबई दफ्तर में हाथ नहीं रखने दिया । इतना ही नहीं बोरकर ने मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन में आईएएस अधिकारी अजीत कुमार के खिलाफ शिकायत की, जिसमें बताया गया कि अजीत कुमार अवैध तरीके से आफिस में घुसने का प्रयास कर रहे है । इसके बाद उप सचिव मनोज जैन और अदिती त्रिपाठी के साथ एक दल फिर जांच करने गया, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। अलबत्ता अतुल बोरकर ने मप्र सरकार के द्वारा पद से हटाने के खिलाफ मुंबई हाईकोर्ट से स्टे ले लिया । सरकार हाथ ही मलती रह गई ।
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बोर्ड की बैठक भी नहीं होने दी

✍सितंबर  2017 में प्रोविडेंट फंड इंवेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की राज्य सरकार ने बैठक बुलाई थी। लेकिन बोरकर ने अपना प्रभाव दिखाकर बोर्ड की बैठक भी नहीं होने दी। इस बोर्ड के चेयरमैन मप्र के वित्त मंत्री है। जबकि acs फायनेंस और स्वयं बोरकर सदस्य है। इसके अलावा मुंबई के दो अन्य लोग भी इस बोर्ड के सदस्य है।
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सदस्य ने ले लिए कंपनी के शेयर

✍नियमानुसार कंपनी का कोई कर्मचारी उसी कंपनी के शेयर नहीं खरीद सकता। लेकिन अतुल बोरकर के इस कंपनी के कुछ शेयर खरीद रखे है।
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रिटायरमेंट के बाद भी कंपनी पर कब्जा

✍मप्र की प्रोविडेंट फंड इंवेस्टमेंट कंपनी 1956 में बनी थी। उस दौरान इस कंपनी संचालन की जिम्मेदारी शापूजी की कंपनी को दी गई थी। बाद में संचालन राज्य सरकार ने अपने हाथ में ले लिया।  1986 से 2002 तक मुंबई में कंपनी का जीएम वित्त सेवा के केएस डोंडियाल को बनाया गया। 2002 में डोंडियाल के रिटायर होने पर कंपनी का जीएम केडी मेनन को बनाकर संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वर्ष  2006 में मेनन के रिटायर होने पर कंपनी के बाबू अतुल बोरकर को मैनेजर बनाकर संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई । रिटायर होने के बाद भी केडी मेनन एक रूपया मानदेय पर लगातार इस कंपनी में काम करते रहे ।
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About Author Umesh Nigam

crime reporter.

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